बुरे मित्र और अपने मित्र पर भी विश्वास नहीं करना चाहिए: आचार्य चाणक्य

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आचार्य चाणक्य एक राजनीतिज्ञ थे उन्होंने लोगों के जीवन से जुड़े बहुत सारे उपदेश दिए हैं जिन्हें लोग आज चाणक्य नीति के रूप में जानते हैं। चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य के द्वारा एक अच्छे जीवन संबंधित बहुत सारे नीति बताई गई है। तो आइए पढ़ते हैं चाणक्य नीति का एक नया उपदेश

बीमारी में, विपत्ति काल में, अकाल के समय दुश्मनों से दुख पाने या आक्रमण होने पर राज दरबार में और श्मशान भूमि में जो साथ रहता है वही सच्चा भाई अथवा बंधु है।

जो अपने निश्चित कर्म हो अथवा वस्तुओं का त्याग करके और निश्चित की चिंता करता है उसका और निश्चित लक्ष्य तो नष्ट होती ही है निश्चित भी नष्ट हो जाता।

बुद्धिहीन व्यक्ति को अच्छे कुल में जन्म लेने वाली कुरुप कन्या से भी विवाह कर लेना चाहिए क्योंकि विवाह संबंध सामान कुल में ही श्रेष्ठ् होता है।

लंबे नाखून वाले हिंसकों पशुओं, नदियों, बड़े-बड़े सिंग वाले पशुओं शस्त्र धारियों, स्त्रियों और राज परिवारों का कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।

विष से अमृत, अशुद्ध स्थान से सोना, नीच कुल वाले से विधा और दुष्ट स्वाभाव वाले कुल की गुणी स्त्री को ग्रहण करना अनुचित नहीं है ।

पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों का भोजन दुगुना लज्जा चौगुनी साहस छः गुना और काम (रति इच्छा ) आठ गुना अधिक होता है।

झूठ बोलना,उतावलापन दिखाना, छल कपट, मूर्खता अत्यधिक लालच करना, अशुद्धता और दयाहीनता ये सभी प्रकार के दोष स्त्रियों में स्वाभाविक रूप से मिलता है।

जिसका पुत्र आज्ञाकारी हो, उसके अनुसार चलने वाली हो, अर्थात पतिव्रता हो, जो अपने पास धन से संतुष्ट रहा हो उसका स्वर्ग यहीं पर है।

जो मित्र प्रत्यक्ष रूप में मधुर वचन बोलता हो और पीठ पीछे अर्थात अप्रत्यक्ष रूप से आपके सारे कार्यों में रोड़ा अटकाता हो, ऐसे मित्र को उस घरे के समान त्याग देना चाहिए जिसके भीतर विष भरा हो और ऊपर मुंह के पास दूध भरा हो ।

बुरे मित्र पर और अपने मित्र पर भी विश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि कभी नाराज होने पर संभवतः आपका विशिष्ट मित्र भी आपके सारे रहस्यों को प्रकट कर सकता है।

मन से विचारे गए कार्य को कभी किसी से नहीं कहना चाहिए, अपितु उसे मंत्र की तरह रक्षित करके अपने (सोचे हुए) कार्य को करते रहना चाहिए।

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