आचार्य चाणक्य के 10 महत्वपूर्ण बातें

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चाणक्य विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक चरित्र है। और चाणक्य नीति भारतीय इतिहास और संस्कृति की एक ऐसी अनमोल निधि है। महा पंडित आचार्य चाणक्य ने जीवन से जुड़े हुए, राजनीति से जुड़े हुए अनेकों प्रकार के अपना विचार दिए हैं। जिसका पालन करके लोग आज सकुशल जीवन व्यतीत कर रहा है। आचार्य चाणक्य ने अपने चाणक्य नीति में जीवन से संबंधित अनेक बातों का वर्णन किया है। आइए जानते हैं आज आचार्य चाणक्य के कुछ महत्वपूर्ण नीति को।

मूर्ख छात्रों को पढ़ाने तथा दुष्ट स्त्री के पालन पोषण से और दुखियों के साथ संबंध रखने से, बुद्धिमान व्यक्ति भी दुखी होता है।

दुष्ट स्त्री, छल करने वाला मित्र, पलट कर तिखा जवाब देने वाला नौकर तथा जिस घर में सांप रहता हो उस घर में निवास करने वाले गृह स्वामी की मौत निश्चित है।

विपत्ति के समय काम आने वाले धान की रक्षा करें, धन से स्त्री की रक्षा करें और अपनी रक्षा धन और स्त्री से सदा करें।

जिस देश में सम्मान नहीं, आजीविका के साधन नहीं, बंधु-बांधव अर्थात परिवार नहीं और विद्या प्राप्त करने के साधन नहीं वहां कभी नहीं रहना चाहिए।

जहां धनी, वैदिक ब्राह्मण, राजा, नदी और वेद ये पांच ना हो वहां दिन भी नहीं रहना चाहिए। जिस जगह इन पांचों का अभाव हो वहां नहीं रहना चाहिए।

जहां जीविका, भय, लज्जा, चतुराई और त्याग की भावना ये पांच ना हो वहां के लोगों का साथ कभी नहीं करना चाहिए।

नौकर को बाहर भेजने पर, भाई बंधुओं को संकट के समय तथा दोस्त को विपत्ति में और अपनी पत्नी को धन के नष्ट हो जाने पर परखना चाहिए।

बीमारी मेंविपत्ति काल में, अकाल के समय, दुश्मनों से दुख पाने या आक्रमण होने पर, राज दरबार में और श्मशान भूमि में जो साथ रहता है वही सच्चा भाई तथा बंधु है और दूसरा कोई नहीं।

जो अपने निश्चित कर्मों अथवा वस्तु का त्याग करके अनिश्चित की चिंता करता है उसका अनिश्चित लक्ष्य तो नष्ट होता ही है निश्चित भी नष्ट हो जाता है।

लंबे नाखून वाले हिंसक पशुओं, नदियों, बड़े-बड़े सिंह वाले पशुओं, शस्त्र धारियों, स्त्रियों और राज परिवार का कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।

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